परिवार और स्वास्थ्य – इस बात में सचमुच दम है कि देश को परिवार चला रहे हैं। समष्टि दृष्टि से देखें तो देश करोड़ों भांति भांति के परिवारों का समुच्चय है, क्योंकि व्यक्ति को इकाई मानने से बहुत से सूक्ष्म विषय छूट जाते हैं या अविश्लेषित रह जाते हैं। हमने स्वास्थ्य के विषय को परिवार से मिला दिया है। इसके पीछे दो मान्यताएँ हैं – एक यह कि परिवार के परिवेश का व्यक्ति के स्वास्थ्य और स्थिति पर काफी असर पड़ता है, और दूसरा यह कि स्वास्थ्य में स्थायी और निरापद किस्म का परिवर्तन पारिवारिक परिवेश के पुष्टिकारक होने में ही निहित है। स्वास्थ्य के ऐसे बहुत से तत्व हैं जिनके सूत्र परिवार एवं घनिष्ठ साथियों की परस्परता से गहराई से जुड़ते हैं। केवल शारीरिक स्वास्थ्य की चर्चा या ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उन शुभाशुभ तत्वों को भी संज्ञान में लाना होगा जो दूसरों की मानसिक संगत से संक्रमित होते हैं। अत: इस खंड में दैहिक स्वास्थ्य से संबंधित सूत्रों की चर्चा तो रहेगी ही, हमारा प्रयास उन उपचारों की चर्चा करना भी रहेगा जिससे कुटुम्ब में सदस्यों के संबंध स्वस्थ प्रगाढ़ता और पारदर्शिता प्राप्त करते हैं और सभी का मन शुद्ध, सहनशील और ओजस्वी बनता है, जो कि मानसिक स्वास्थ्य की प्राथमिक शर्त मानी जा सकती है।
क्या हम सही दिशा में सोच रहे हैं?
चिंतन का विषय - शुरू शुरू में जब समझदारी एक नयी-नयी चीज़ की तरह दिखायी देती थी, तब मैंने जीवन का एक कामचलाऊ प्रारूप बना लिया था, जो जीवन ...






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